UPTET NEWS: बीएड बनाम बीटीसी के मामले मे, कोर्ट के आदेश की व्याख्या बीटीसी की तरफ से
1-सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर ऑर्डर बिंदु 36 में कोर्ट ने बहुत से आदेशों का हवाला देते हुए कहा है सरकार या संस्था कोई कानून/शासनादेश बना सकते हैं सरकार नीतिगत फैसला भी ले सकती है परन्तु उद्देश्य क्लियर होना चाहिए जैसे कि यह न लगे कि किसी वर्ग विशेष को लाभ देने के लिए एवं किसी वर्ग विशेष को वंचित करने के कानून बना हो यदि ऐसा है तो वह तभी तक टिकता है जबतक उसकी न्यायिक समीक्षा न हो जाये यहाँ 28 जून 2018 के नोटिफिकेशन का कोई उद्देश्य नहीं दिखता लगता है सरकार ने ncte पर दबाव डाल कर ऐसा कराया क्योंकि rte act की art 21(1) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करता है 1 to 5 को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतु शिक्षक की योग्यता btc या जो rte एक्ट के मानक है वह होना चाहिए बीएड 6 से 12 हेतु है परन्तु शिक्षकों की कमी के कारण भी बीएड को प्रायमरी में एलिजबिल माना जा सकता था जैसा 72825 में हुआ परन्तु 69 प्रायमरी शिक्षक भर्ती में btc,डीएलएड की संख्या पद के सापेक्ष्य दो गुनी थी फिर भी rte act की धारा 21(1)का उल्लंघन करके अनुचित संशोधन करके बीएड को प्रायमरी में घुसेड़ा गया कुल मिलाकर माननीय कोर्ट को सरकार या ncte स्पस्ट उद्देश्य समझाने में नाकाम रहे इसलिए 28 जून 2018 के गजट रदद् कर दिया।
2-गजट रदद् होने के बाद अब प्रायमरी में बीएड एलिजबिल नहीं रहा परन्तु 2018 गजट के आधार पर उत्तरप्रदेश में 69K प्रायमरी शिक्षक भर्ती हुई और उससे पहले शिक्षक पात्रता परीक्षा में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एडुकेशन दिल्ली ने तथा परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद ने ctet/tet इसी निरस्त हुए गजट के आधार पर प्रायमरी स्तर की इलिजबिल्टी टेस्ट कराया जिस सर्टिफिकेट के आधार पर 69K में बीएड tet, ctet पास अभ्यर्थी अप्लाई करके अध्यापक बन गए अब सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर के बाद इन संस्थाओं ने बीएड की प्रायमरी स्तर की tet, ctet सर्टिफिकेट रदद् कर दिए जिसके आधार पर यह नौकरी कर रहे थे फिर एलिजबिल कहाँ रहे।
3-69K में चयनित बीएड अभ्यर्थियों को 6 माह का ब्रिज कोर्स कराना था 6 माह की अवधि में as a tranee मानदेय पर इनको रहना था परन्तु सरकार ने पहली गलती यह की कि इनको डायरेक्ट अध्यापक पद पर नियुक्त कर दिया और दूसरी गलती मानदेय की जगह सीधे सैलरी देने लगे।
4-अभी हाल ही में ntce के चैयरमैन का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे वह भर्ती हो चुके बीएड को सेफ बता रहे हैं आपको याद होगा जब शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त हुआ था तब उस वक्त के चैयरमैन ने भी शिक्षा मित्रों को सेफ बताया था लेकिन ऐसा हुआ नहीं उनकी नौकरी चली गई इसलिए इनके ब्यान का कोई मतलब नहीं है आज नहीं तो कल माननीय कोर्ट ऑर्डर को क्लेरिफाई करके बीएड को 69K से बाहर का रास्ता दिखायेगा। और अगर कोर्ट सख्ती से पेश आई तो 69K में चयनित बीएड शिक्षकों से सैलरी की वसूली भी करने का आदेश दे सकती है।
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