दो महीने से अधिक लंबे लॉकडाउन में बच्चे अकेलापन महसूस करने लगे हैं, लॉकडाउन में बच्चों को याद आ रहे स्कूल, टीचर और दोस्त

दो महीने से अधिक लंबे लॉकडाउन में बच्चे अकेलापन महसूस करने लगे हैं, लॉकडाउन में बच्चों को याद आ रहे स्कूल, टीचर और दोस्त

दो महीने से अधिक लंबे लॉकडाउन में बच्चे अकेलापन महसूस करने लगे हैं। पढ़ाई का नुकसान कम करने को स्कूलों ने ऑनलाइन कक्षाएं तो शुरू कर दीं लेकिन बच्चों को अपने स्कूल, क्लासरूम, टीचर, दोस्त, खेलकूद, आर्ट्स, म्यूजिक आदि की कमी खल रही है। द एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया की ओर से यूपी समेत विभिन्न राज्यों के 466 सरकारी एवं प्राइवेट स्कूल के बच्चों पर कराए गए ऑनलाइन सर्वे में यह बात सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन से शिक्षा में डिजिटल क्रांति और शिक्षक की भूमिका में बड़ा बदलाव भले आया हो लेकिन घर स्कूल-कॉलेज की जगह नहीं ले सकते। सर्वे में शामिल 88 प्रतिशत बच्चों का कहना है कि वह अपने शिक्षकों से संवाद नहीं कर पा रहे और उन्हें दोस्तों की भी याद आ रही है। 51 फीसदी बच्चे कोर्स के अतिरिक्त गतिविधियां जैसे शारीरिक शिक्षा, खेल, कला, संगीत और नृत्य की कक्षाओं की कमी महसूस कर रहे हैं। तकरीबन 50 प्रतिशत बच्चों का कहना है कि क्लासरूम के माहौल और शिक्षकों की अनुपस्थिति में उन्हें विषय समझने में परेशानी हो रही है। कक्षाओं से पूरी तरह अलग घर के वातावरण में पढ़ाई के लिए तालमेल बिठाना मुश्किल हो रहा है। इसके उलट 37 प्रतिशत ऐसे बच्चे भी हैं जिनका कहना है कि घर पर वे अधिक एकाग्रता से पढ़ाई कर पा रहे हैं।

मैं यह बात हमेशा कहता हूं कि मशीन कभी भी इंसान की जगह नहीं ले सकती। क्लासरूम टीचिंग में जो ह्यूमन टच होता है वो ऑनलाइन संभव नहीं है। डॉ. योगेश तिवारी डायरेक्टर एकेडमिक बाल भारती स्कूल

क्लासरूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं हो सकता। शिक्षकों और दोस्तों से सीधे संवाद समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं। ऑनलाइन क्लास चला रहे हैं ताकि पढ़ाई का नुकसान न हो

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